Prof. Arun Tiwari

25 Posts
Co-author of 'Wings of Fire' Arun Tiwari, former missile scientist and pupil of Dr. APJ Abdul Kalam.

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Prof. Arun Tiwari
Goswami Tulsidas wrote a very innovative narrative towards the end of Ramcharitmanas, as a dialogue between the eagle, Garuda, and the crow, Kakbhushundi। काकभुशुंडि का चरित्र वाल्मीकि रामायण और अध्यात्म रामायण में मौजूद नहीं है और गोस्वामीजी ने इसे मौलिक रूप से रचा है। Kakbhushundi has...

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Prof. Arun Tiwari
The gateway to hell, after lust and greed is anger. बचपन से ही हम सभी, गुस्से को महसूस करना और इसे व्यक्त करना, दोनों तरह से जानते हैं। क्रोध का झुँझलाने से लेकर भयंकर रोष तक बड़ा व्यापक स्पेक्ट्रम है। न केवल मनुष्यों में बल्कि...

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Prof. Arun Tiwari
Greed is nothing but the endless desire to get more and more of something or things in life. लालच ज्यादातर समय अपने बारे में सोचना है, बिना इस बात की परवाह किए कि दूसरे व्यक्ति को कैसा लगता है। हमारे स्वार्थी कार्य और विचार, अगर...

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भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता में काम, क्रोध और लोभ को नर्क के तीन द्वारों के रूप में घोषित किया है – त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन: Pretty strong language! People are impelled to commit sin, even unwillingly, as if by force. Amongst these three,...

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तारीफ़ की तलब एक बुरी लत है, जो आपको कमजोर करती जाती है। People are desperately trying to get approval and acceptance from others. They never feel good enough, and they are terrified of social rejection. आपकी पहली प्रतिक्रिया शायद होगी – अरे बेचारे!  लेकिन...

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मानव जीवन की सबसे बड़ी बर्बादी व्यसनों में देखी जाती है। A person with an addiction uses substances such as alcohol, inhalants, opioids, cocaine, and nicotine, or engages in unwholesome behaviors such as gambling, जिनमें क्षणिक आनन्द का अनुभव, हानिकारक परिणामों के बावजूद, गतिविधि को...

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मध्य मार्ग क्या है? Not too much of anything, nothing in excess, moderation in all things? The Bhagavad Gita declared a sense-controlled man as a robot, and human action as the qualities of nature acting upon the body-mind: भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया (xiii. 61). Nature’s commands are three...

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The dreamless sleep state is called “Prajnya” in the Bhagavad Gita. प्रज्ञा मानव मन से मुक्त है और जीवन शक्ति की मूल प्रतिनिधि है – वह बुद्धि जो हमारे शरीर को नियंत्रित करती है – वस्तुतः “प्राणमय कोष” को चलाती है। We breathe 18 times...

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Last week, we were discussing dreams. I called them a communication from your soul and the archetypes living in your mind, for your welfare. आइए, कुछ सामान्य सपनों और विद्वान लोगों द्वारा समझी गयी सपनों की कुछ लोकप्रिय व्याख्याओं पर ध्यान दें। The commonest of...