Dimple Anmol Rastogi

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डिम्पल अनमोल रस्तोगी पिछले काफ़ी समय से हिंदी भाषा में अपनी लेखनी से अपने मनोभावों और आस-पास के अनुभवों को कविताओं, लेख और कहानियों के माध्यम से अभिव्यक्त करती आयी हैं। आपकी हमेशा कोशिश रहती है कि कुछ सार्थक लिखें जिससे समाज को एक दिशा मिल सके। लेखन के अतिरिक्त आप पिछले कई वर्षों से सामाजिक जीवन में ज़रूरतमंदों के लिए सेवा कार्य में पूरी तरह से सक्रिय हैं।

मासिक धर्म – आज भी टैबू

Dimple Anmol Rastogi
हमारे देश भारत में मासिक धर्म के बारे में बात करना आज भी एक बड़ा टैबू हैं। मासिक धर्म को लेकर अनेकों मिथ हैं, अनेकों ग़लत धारणायें हैं। अब समय आ चुका हैं खुल कर इस विषय में बात की जाए। साथ ही उन मिथकों...

उम्मीद की किरण : डिम्पल अनमोल रस्तोगी की लिखी

Dimple Anmol Rastogi
किसी दिन मेरी बेटी भी कलेक्टर बनेगी! बस यूँ ही सोचते-सोचते कब सीमा की आँख लग गयी उसे पता ही नहीं चला। सुबह उठकर उसने अपने पास सो रही अपनी 7 वर्षीय बेटी निक्की को प्यार से देखा। कल ही की तो बात है, ना...