सोशल

नोबेल साहित्‍य पुरस्‍कार में भारतीय दावेदारी

Dr. Dushyant
इस साल नोबेल साहित्‍य पुरस्‍कार अमेरिकी कवि लुईस ग्‍लूक को दिया गया है। भारत को अब तक का अकेला पुरस्‍कार 1913 में मिला था, रवींद्रनाथ ठाकुर को ‘गीतांजलि’ के लिए। यानी सौ साल से ज्‍यादा हो गए, ऐसे समय, भारतीय दावेदारी पर नजर डालनी चाहिए,...

लाइव पुराण

Era Tak
चेतावनी – कमज़ोर दिल वाले इस आलेख को न पढ़ें क्योंकि गंभीर रूप से आहत होने का खतरा है. अब तक भारत में कोई बीमा कम्पनी इस खतरे का कोई बीमा नहीं करती! यह व्यंग्य लेख सत्य घटनाओं से प्रेरित है, लेखक ने अपने को...

कोविड-19 में सोशल नेटवर्किंग से कर रहे ऐसे राह आसान

Shivani Khare
इस रुकी हुई और मजबूरन थमी हुई दुनिया में भी बीतते समय के साथ, देखो, लोग चलने लगे हैं। कुछ अलग चाल से, कुछ अलग ही अंदाज़ में! इस वक्त जहाँ मैं अपने कंप्यूटर पर एक विंडो पर JLF के #JLFBraveNewWorld के ज़रिये एक गंभीर...

आखिर अभिमन्यु मारा गया!

Pradeep N. Khare
आज जब महाभारत का सीरियल देख रहा था तो देखते-देखते यह विचार आया कि अभिमन्यु को जिस तरह घेर कर 7 महारथियों ने मारा, उसकी निर्मम हत्या की, यह उदाहरण प्रस्तुत करता है उन स्टार्ट अप कंपनियों के लिए जो बहुत हिम्मत करके अपने किसी...

हनुमान आज भी कितने प्रासंगिक

Pradeep N. Khare
आज के संदर्भ में, राम कथा में, हनुमान कितने प्रासंगिक हैं, इससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता. राम के लिए हनुमान की निष्ठा और कर्तव्य परायणता अपनेआप में एक उदाहरण प्रस्तुत करती है. हमारे जीवन में हमारे समाज में और खासतौर से आज के...

पलायन 2020

Pradeep N. Khare
आजकल ‘पलायन’ शब्द ने सबको चौंका दिया है। हम लोगों ने इस शब्द को जब सुना था, वह समय हिंदुस्तान-पाकिस्तान के पार्टीशन का था। आज के बच्चे इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते। लेकिन इधर कुछ दिनों से पलायन शब्द आम आदमियों की  ज़ुबां...

वैश्विक आपदा कोरोना काल में गांधी चिंतन

Pradeep N. Khare
कोरोना वायरस या कोविड-19 एक ऐसी त्रासदी है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. यह इस सेंचुरी की सबसे बड़ी त्रासदी है और जिसकी समस्या कितनी बड़ी होने वाली है इसकी कल्पना करना भी असंभव है. जो आज के हालात हैं, पूरी दुनिया...