Era Tak

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इरा टाक, लेखक, चित्रकार और फिल्मकार हैं। वर्तमान में मुंबई रह कर अपनी रचनात्मक यात्रा में लगी हैं। दो काव्य संग्रह - अनछुआ ख़्वाब, मेरे प्रिय, कैनवस पर धूप , कहानी संग्रह - रात पहेली, नॉवेल - रिस्क @ इश्क़, मूर्ति, ऑडियो नावेल- गुस्ताख इश्क, लाइफ लेसन बुक्स- लाइफ सूत्र और RxLove366. कैनवस पर धूप उनकी नौवी किताब है. शॉर्ट फिल्म्स - फ्लर्टिंग मैनिया, डब्लू टर्न, इवन दा चाइल्ड नोज और रेनबो उनके खाते में दर्ज हैं। कलाकार के रूप में नौ एकल प्रदर्शनियां कर चुकी हैं। इरा आजकल एक प्रोडक्शन हाउस के लिए फीचर फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रही हैं।

बच्चे को मशीन नहीं इंसान बनाइये : बच्चे पालना बच्चों का खेल नहीं

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जैसे-जैसे वक्त बदला पेरेंट्स और बच्चों का रिलेशनशिप बदलता गया. बचपन में अक्सर पलट कर जवाब देने पर मेरी मां कहतीं थीं- हम तो अपने पेरेंट्स के सामने सिर तक नहीं उठा पाते थे और तुम हमको पलट कर जवाब देती हो. आज के दौर...

सपने आंख में, पर जियो आज में

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2020 में कोरोना ने दुनिया का रुख बदल दिया. किसी का कम, किसी का ज्यादा पर सभी का जीवन इससे प्रभावित हुआ. लाखों लोग बीमारी का शिकार हो गये और हजारों लोग अवसाद और बेरोजगारी या भुखमरी से मर गये. न जाने कितनी जिंदगियां अतीत...

मैडम चीफ़ मिनिस्टर फ़िल्म का रिव्यु | Madam Chief Minister film review in Hindi

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खोल पंख अब मार उडारी ‘मैं बचपन से जिद्दी हूँ, अक्खड़ हूँ’— जब तारा ये बात बोलती है तो दिल को छूती है. ये सच है कि जो औरतें जिद्दी होती हैं, वही दुनिया में अपनी जगह बना पाती हैं. जो स्त्रियाँ अपना हक मांगती...

डोंट स्टॉप, अनटिल फुल स्टॉप

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थके होने पर भी जो कदम दौड़ने का हौसला रखते हैं, वही जीतते हैं. निरंतर चलना है जरूरी… पर अक्सर रुक जाते हैं हम, बता कर कोई मजबूरी! जब आप रुक जाते हैं, वहीं से वापस शून्य तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है....

कोरोना काले, सुविचारित बुद्धि

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सर्दियां शुरू हो चुकी हैं, अभी त्योहारों का मौसम गुजरा है और शादियों का मौसम चालू है. ऐसे में शादियों में जाना, बाजार जाना, दोस्तों, रिश्तेदारों, मेहमानों का आना-जाना! दूरी रखते हुए भी न जाने कब फोटो खिंचाते हुए करीब आ जाना, मास्क को ठीक...

अच्छी Habit… All time Debit.

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A habit is a routine of behaviour that is repeated regularly and tends to occur subconsciously. आदतें जिंदा रखती हैं, आदतें काटती भी हैं. आदत जीने का तरीका हैं, शौक हैं, हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. हम अपनी आदतों के साथ इतने सेट...

स्टाइल और ट्रेडिशन की जुगलबंदी : इंडो-वेस्टर्न साड़ी ऑन दिवाली

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“There is no rule for fashion” यानी फैशन का कोई रूल नहीं. जो आपको सबसे अलग दिखाए, जिसको अपना कर आपको अच्छा लगे, आराम मिले, वो फैशन ! इतिहास खुद को दोहराए या न दोहराए, फैशन ख़ुद को ज़रूर दोहराता है, वक़्त और जनरेशन की...

दिवाली पर फिट हैं तो हिट हैं!

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मिठाई, पकवान, दोस्तों के साथ लंच-डिनर और बहुत सारी मस्ती. नवरात्रि से फेस्टिवल सीजन शुरू हो चुका है और आप सब भी जोर-शोर से तैयारियों में लगे होंगे. कोरोना की वजह से माहौल थोड़ा ठंडा ज़रूर है पर मन में उम्मीदों के जुगनू भी टिमटिमा...

Dare to Dream the Unseen!

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“तुम बड़े होकर क्या बनोगे?”- ये सवाल बच्चे से तब से पूछा जाना शुरू हो जाता है, जब से वो बोलना सीखता है। इस सवाल को सुनकर वह सोचने पर मजबूर होता है और यहीं से शुरू होता है, सपने देखने और दिखाने का सिलसिला-...

ख़ुद में कर ख़ुद की तलाश, ख़ुदा मिल जायेगा

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“क्रियां विना ज्ञानं भारः भवति” अर्थात कर्म के बिना ज्ञान बोझ होता है। कई बार मनुष्य जानता बहुत कुछ है लेकिन उस ज्ञान को अपने जीवन में अपनाता नहीं और यही दुख-परेशानी, नकारात्मकता और अवसाद का मूल कारण है। आपने अक्सर देखा होगा जब आप...