छुट्टियाँ बन जाएँ यादगार

बच्चों की गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी हैं. बच्चों को साल भर गर्मी की छुट्टियों का इंतज़ार रहता है. वे अपनी दादी, नानी के घर या अपने पेरेंट्स के साथ कहीं घूमने जायेंगे. कुछ दिन घूम-फिर आने के बाद भी उन पर खूब सारा समय है. पैरेंट होने के नाते आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप उनको इस समय का ठीक से और wisely इस्तेमाल करना सिखाएं. हमारा जीवन समय से बना हुआ है. ऐसे में समय का सही और सार्थक इस्तेमाल आगे बढ़ने में सहायक होता है. आजकल स्कूल्स भी खूब सारा होमवर्क, वर्क शीट्स दे देते हैं, जिससे पढ़ाई करना भी बच्चों की मजबूरी हो जाती है. बाकी बचे हुए समय में बच्चों को कई तरह की एक्टिविटी में engage रख कर उनकी पर्सनालिटी को निखारा जा सकता है.

 

सिखाएं कोई हॉबी

रोज़मर्रा में आजकल बच्चों पर पढ़ाई का इतना प्रेशर है कि कई बार वे चाह कर भी अपनी पसंद का काम नहीं कर पाते हैं, ऐसे में ये मन की करने का सबसे अच्छा समय है. उनको म्यूजिक, कोई इंस्ट्रूमेंट सीखने, पेंटिंग, राइटिंग, क्राफ्ट, फोटोग्राफी आदि के लिए प्रोत्साहित करें. गर्मियों में होने वाले हॉबी क्लासेज या समर कैंप में भी भेजा जा सकता है, जहाँ सीखने के साथ-साथ वो और बच्चों से डील करना भी सीखता है, उसके अन्दर टीम स्पिरिट डेवलप होती है. एक्टिंग और थिएटर सिखाना भी अच्छा आप्शन है, इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ता है. अगर बच्चे इनमें से किसी भी गतिविधि में इन्वोल्व होंगे तो उनकी अपार उर्जा सही जगह केन्द्रित रहेगी और वे जीवन को बेहतर तरीके से समझ पायेंगे.

 

घर के कामों में लें मदद

समर वेकेशन बच्चों को घर के काम सिखाने का अच्छा समय है, घर के काम सभी बच्चों को, चाहे वो लड़का हो या लड़की, आने बहुत ज़रूरी हैं, इससे वो ज़िम्मेदार बनते हैं. बच्चे खेल- खेल में काम सीख भी लेते हैं और ज्यादा अनुशासित हो जाते हैं.

वैसे तो आप उनके लिए रोज कुक करती ही हैं, उनको साथ में रखिये, कुक करना सिखाये, चाय- कॉफ़ी, मैगी बनाने, सलाद या फल काटने जैसे कामों में उनकी मदद ली जा सकती है. इसके अलावा घर की साफ़ सफ़ाई, अपना कमरा सेट करने की उनको आदत डालें. घर में बड़े बुजुर्गों का ध्यान रखना, pet की देखभाल, पौधों में पानी डालना, डाइनिंग टेबल पर खाना लगाना, घर की सेटिंग/इंटीरियर चेंज करने जैसे कामों में बच्चों की मदद ली जा सकती है. इससे उनके अन्दर ज़िम्मेदारी का भाव पैदा होगा और वो घर के काम की वैल्यू समझेंगे.

नेचर से जोड़ें

उनको रोज़ सुबह या शाम घर के पास किसी गार्डन में जाने की आदत डालें, जहाँ वो रनिंग, हलकी फुल्की एक्सरसाइज, खेलकूद कर सकें. रोज़ स्विमिंग के लिए जाना भी अच्छा आप्शन है, इससे वो शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत बनेंगे. उनको घर में लगे पौधों की देखभाल करना सिखाएं. पौधों में सुबह शाम पानी देने की ड्यूटी लगा दें, इससे आपको भी आराम मिलेगा साथ ही साथ बच्चों के लिए पेड़- पौधों को जानने, समझने का मौका मिलेगा और उनकी बॉटनी भी सुधर जायेगी. बच्चों की नदी, नाहर, झीलों, पहाड़, जंगलों, सूरज, चाँद, तारों से पहचान करानी बेहद ज़रूरी है, ताकि उनको मालूम पड़े कि मोबाइल और टीवी के अलावा एक बहुत बड़ी खूबसूरत दुनिया है. रात को छत पर लेट कर उनको तारे देखने सिखाने चाहिए, आजकल कई एप्प उपलब्ध हैं जो तारों और ग्रहों की सही स्तिथि बताते हैं. उनको कुदरत के दिए उपहारों जैसे धूप, पानी, जंगल, हवा, फल फूलों आदि का ऋणी होना सिखाएं. हफ्ते में एक या दो बार उनको ट्रैकिंग पर भी ले जाया जा सकता है. शहर में बने ऐतिहासिक स्मारकों को दिखाया जा सकता है, उनसे जुड़े इतिहास की जानकारी भी दी जानी चाहिए ताकि उनकी जनरल नॉलेज भी बढती रहे.

 

गजेट्स से रहे दूरी

आपको Free time मिल जाए इस वजह से बचपन से ही बच्चों के हाथों में मोबाइल gadgets न दें… उनको किताबें पढ़ने,  दोस्त बनाने, puzzle solve करने, music सीखने, पेंटिंग बनाने, घर के छोटे- मोटे काम करने, खिलौनों और मिट्टी में खेलने को प्रेरित करें. कुछ भी नहीं तो उनको खिड़की से झांक कर observe करने को बोलें. घर में एक pet रखना भी अच्छा option है. मोबाइल सिर्फ़ एक ज़रूरत है उसको ज़िंदगी न बनाएं. वर्ना बाद में आप खुद कहेंगे कि बच्चा बात नहीं मानता. छुट्टियाँ हैं ये सोच कर भी बच्चों को गजेट्स के साथ ज्यादा वक़्त बिताने की छूट न दें, इससे वो ज़िन्दगी के कई खूबसूरत लम्हों से वंचित रह जाते हैं, आँखें और स्वास्थ खराब होता है सो अलग. बच्चों को कहानियां बुनने को प्रेरित करें और रोज़ रात उनसे कहानियां या उनके अनुभव सुनें और उनको अपने बचपन के किस्से- कहानियां भी सुनाएँ, इससे आपके और बच्चे के बीच इमोशनल बोन्डिंग मजबूत होगी.

इंडोर-आउटडोर गेम्स करें शामिल

याद कीजिए आखिरी बार आपने कैरम कब खेला था? हमारे बचपन में कैरम, लूडो, ताश, बिजनेस, सांप सीढ़ी जैसे गिने चुने इंडोर और बैडमिंटन, क्रिकेट, खो खो, कबड्डी आदि जैसे आउटडोर गेम्स ज्यादा चलते थे और अब ज़्यादातर गेम्स मोबाइल पर ही आ गये हैं, जिनको खेलने में न पसीना निकलता है और न ही बेफ़िक्र हंसी गूंजती है. वक़्त है बच्चों को मोबाइल से निकाल कर असली गेम्स खिलाएं जाए, मिट्टी में लोटा जाए, घास पर लुढ़का जाए, बच्चों के साथ बच्चा बन कर अपना बचपन फिर से जिया जाए. अपने काम से समय निकाल कर सुबह जल्दी या देर रात बच्चों के साथ कई तरह के गेम्स खेले जा सकते हैं, यकीन मानिए मज़ा आएगा.

तो दोस्तों! अच्छे बच्चे बनाने को वक़्त और क्वालिटी टाइम देना बहुत ज़रूरी है, ये एक साधना है, उन पर हावी होने के बजाय उनके दोस्त बनें. माना कि आज के बच्चे टेक्नोलॉजी के मामले में हमसे बहुत आगे हैं पर फिर भी दुनिया का अनुभव पेरेंट्स के पास ज्यादा होता है, ऐसे में उनको समय-समय पर दुनियादारी समझाते रहें, अपनी मुश्किलें, संघर्ष, असफलता, सफलता सांझा करते रहें. और जो आपको न आता हो वो बच्चों से पूछने में बिलकुल न झिझकें, आपको सिखाते हुए बच्चे का भी कॉन्फिडेंस बढ़ेगा.

तो तैयार हो जाइए, ये छुट्टियाँ अपने और अपने बच्चों के लिए यादगार बनाने को.

हैप्पी हॉलीडेज!

Image credit: Era Tak

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