SatyaaDeep Trivedi

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SatyaaDeep Trivedi is a budding Writer known for his Innovative ventures through multiple forms of Writing i.e. poetry, short story and satirical articles. He, along with his writings bridges the gap between traditional and 'Nayi Wali' Hindi. ​ ​सत्यदीप त्रिवेदी, युवा कलमकार, ग़ज़ल, कविता, कहानी, लघुकथा और अपने चुटीले लेखों के ज़रिए हिंदी साहित्य में बराबर दखल रखते हैं। सत्यदीप की लेखनी को पढ़ने का अर्थ है, परंपरागत हिंदी के पेड़ की छाँव में बैठकर, नई वाली हिंदी की धूप सेंकना।

तालाब एक दलदल है : सत्यदीप त्रिवेदी की लिखी

SatyaaDeep Trivedi
किसी गाँव में एक तालाब था – साफ़-सुथरा, सजीला सा। ​ग्रामीण उसकी पूजा किया करते थे। उसमें नहाकर ख़ुद को धन्य-धन्य समझते थे। बड़ी श्रद्धा से उसके पानी को सर पर लगाते थे। तालाब के पानी से गाँव भर की ज़रूरतें पूरी होतीं थीं। खेतों...

लेखक की प्रेमकथा : सत्यदीप त्रिवेदी की लिखी

SatyaaDeep Trivedi
“तुम कुछ करते क्यों नहीं..?” “ऊँ ? करते तो हैं।” “क्या” “लिखते हैं।” “ओफ्फो, अरे आगे के लिए। जीने के लिए?” “करते तो हैं।” “क्या करते हो?” “तुमसे इश्क़।” लड़के ने गर्दन को कुछ अंदर की तरफ़ समेटते हुए, बिला वज़ह की नज़ाक़त से कहा।...

ज़ीरो : कहानी सत्यदीप त्रिवेदी की लिखी

SatyaaDeep Trivedi
शून्य यानी ज़ीरो। इसकी महिमा भी अपरंपार है साहब। देखिये तो कुछ नहीं है और देखिये तो बहुत कुछ है। पुरानी हिंदी फिल्मों में ग़रीब हीरो जब अपनी माशूक़ यानी हीरोइन का हाथ मांगने उसके घर जाता था, तब हीरोइन का खूसट बाप उसकी मुफ़लिसी...

एनकाउंटर : कहानी सत्यदीप त्रिवेदी की लिखी

SatyaaDeep Trivedi
सँझवाती का समय है। बाज़ार में घुसने से पहले एक मोड़ पड़ता है, उस मोड़ पर पैंतालीस-छियालीस साल की एक औरत टोकरी में तरकारी बेच रही है। औरत का बदन देहाती क़िस्म का है- भरा-भरा सा। रंग कुछ साँवला है लेकिन चेहरे पर कसावट अभी...

लव इन ऑनलाइन मोड

SatyaaDeep Trivedi
‘हाय!’ ‘हलो, कौन?’ ‘क्यों डीपी में शकल नहीं दिख रही क्या?’ ‘नहीं, आई मीन हाँ, लेकिन पूछना फॉरमैलिटी है।’ ‘हाहाहा! स्मार्ट! आई होप तुम अब ये नहीं पूछोगी कि नंबर कहाँ से मिला।’ ‘नहीं, इतनी बुद्धू थोड़ी हूँ। हम दोनों में सिर्फ़ एक ही चीज़...

कोरोना_काले_कथा

SatyaaDeep Trivedi
आजकल के बच्चे भी बड़े बद्तमीज़ हो गए हैं। बड़ों का तो लिहाज़ ही नहीं रहा बिल्कुल। ज़बान तो कोरोना केसेज़ की तरह दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। बताइये ज़रा, आज सुबह मेरा 12 साल का बेटा मुझसे बहस लड़ा रहा था। पढ़ाई-लिखाई तो...